ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की अंतिम यात्रा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए। सरकारी मीडिया के मुताबिक, अंतिम दर्शन और जनाज़े में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसी बीच तीसरे दिन जनाज़े में कुछ ऐसे घटनाक्रम देखने को मिले, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हो रही है।
ईरान ने दिखाई अपनी ‘ट्रिपल H’ ताकत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया था कि ईरान की पूरी शीर्ष नेतृत्व एक जगह मौजूद है और अगर अमेरिका चाहे तो कार्रवाई कर सकता है, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया क्योंकि आगे बातचीत की संभावना बनी रहनी चाहिए। इसी बीच तीसरे दिन ईरान ने अपने समर्थक संगठनों की मौजूदगी के जरिए ताकत का संदेश दिया।
हमास, हिजबुल्लाह और हूती एक साथ पहुंचे
सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हमास, हिजबुल्लाह और हूती के प्रतिनिधि अयातुल्ला अली खामनेई के जनाज़े में शामिल हुए। गाजा युद्ध और ईरान-इजराइल तनाव के बाद इन संगठनों की मौजूदगी को ईरान के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
3 मुस्लिम देश नहीं पहुंचे
जहां एक ओर 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचे, वहीं संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और कुवैत ने अपने प्रतिनिधि अंतिम यात्रा में नहीं भेजे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इन देशों के शामिल न होने को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि इन देशों की ओर से कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया। भारत की ओर से भी प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचा।
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3000 कब्रों की तैयारी क्यों हुई?
जर्मन अखबार WELT की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के बेहेश्त-ए-जहरा कब्रिस्तान में लगभग 2 से 3 हजार कब्रें पहले से तैयार की गई थीं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि अगर जनाज़े के दौरान कोई आपात स्थिति, हमला या भगदड़ जैसी घटना होती है तो उससे निपटने के लिए पहले से तैयारी की गई थी। हालांकि इस संबंध में ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
किन शहरों से गुजरेगा जनाज़ा?
फिलहाल अयातुल्ला अली खामनेई का पार्थिव शरीर ग्रैंड मुसल्ला, तेहरान में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।
इसके बाद जनाज़े को क़ोम ले जाया जाएगा, जिसे शिया मुसलमानों का प्रमुख धार्मिक शहर माना जाता है। यहां हज़रत फातिमा का रौज़ा मौजूद है।
इसके बाद कार्यक्रम के अनुसार नजफ़ और कर्बला में भी श्रद्धांजलि दी जाएगी। ये दोनों शहर शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में गिने जाते हैं।
अंत में पार्थिव शरीर को दोबारा ईरान लाकर मशहद में सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाने की तैयारी है। मशहद में इमाम रज़ा का रौज़ा स्थित है और शिया समुदाय में इस स्थान का विशेष महत्व माना जाता है।
तीन बेटे अंतिम विदाई में पहुंचे, मोजतबा नहीं दिखे
अयातुल्ला अली खामनेई के चार बेटे हैं—मुस्तफा, मोजतबा, मसूद और मीसम। अंतिम यात्रा के दौरान मुस्तफा, मसूद और मीसम सार्वजनिक रूप से अपने पिता को अंतिम विदाई देते दिखाई दिए। वहीं संभावित उत्तराधिकारी माने जा रहे मोजतबा खामनेई कार्यक्रम में नजर नहीं आए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) ने सुरक्षा कारणों से उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल न होने की सलाह दी थी। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।




