एक तरफ अकेला ईरान था और दूसरी तरफ अमेरिका और इजराइल जैसी बड़ी ताकतें। करीब 108 दिन तक चले संघर्ष के दौरान तीनों देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। युद्ध के बीच इजराइल ने ईरान के तीन बड़े सैन्य और राजनीतिक नेताओं को मारने का दावा किया था। लेकिन अब तेहरान में अयातुल्ला अली खामनेई के जनाज़े में ईरान के तीन बड़े नेता सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए, जिसके बाद इजराइल के पुराने दावों की पोल खुल गई।
इतिहास का सबसे बड़ा जनाज़ा बनने का दावा
ईरान में इससे पहले 1989 में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। अब ईरानी सरकारी मीडिया और कई रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि अयातुल्ला अली खामनेई के जनाज़े में चार दिनों के दौरान करीब दो करोड़ लोग शामिल हुए हैं। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या और अधिक होने का भी दावा किया गया है। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रंप का बयान भी चर्चा में
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें लगा था कि ईरान के लोग अयातुल्ला अली खामनेई को पसंद नहीं करते, लेकिन जनाज़े में उमड़ी भीड़ देखकर वह हैरान हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि यह भीड़ वास्तविक है या नहीं, इस पर सवाल उठाए जा सकते हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी काफी बहस देखने को मिली। लेकिन अब आपको उन तीन नेताओं के बारे में बताते हैं जिन्हें इजराइल में मारने का दावा किया लेकिन आज ये तीनों लीडर अयातुल्ला अली खामनेई के जनाज़े में सारी दुनिया के सामने आ गए
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1. महमूद अहमदीनेजाद
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर नहीं आए थे। युद्ध के दौरान सोशल मीडिया पर उनके मारे जाने के दावे भी वायरल हुए थे।
हालांकि अब अयातुल्ला अली खामनेई के जनाज़े में उनकी मौजूदगी सामने आने के बाद उन दावों पर फिर सवाल उठने लगे हैं।
2. अहमद वाहिदी
ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी अहमद वाहिदी को लेकर भी संघर्ष के दौरान उनके मारे जाने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि ईरान ने उस समय इन दावों को खारिज कर दिया था।
अब खामनेई के जनाज़े में अहमद वाहिदी सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश सफल नहीं होगी और देश अपनी रणनीति पर आगे बढ़ता रहेगा।
3. इस्माइल कानी
ईरान की कुद्स फोर्स के प्रमुख इस्माइल कानी को लेकर भी युद्ध के दौरान कई तरह की अटकलें लगाई गई थीं। ईरान ने पहले ही कहा था कि वह जीवित हैं और हमले में घायल हुए थे। अब पहली बार अयातुल्ला अली खामनेई के अंतिम विदाई कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी सामने आई है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस्माइल कानी को ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व का बेहद करीबी माना जाता है और विदेश सैन्य रणनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
कोम शहर पहुंचा जनाज़ा
अयातुल्ला अली खामनेई का जनाज़ा अब तेहरान से आगे कोम शहर पहुंच चुका है। यहां भी बड़ी संख्या में लोग अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे। अंतिम यात्रा के दौरान लगातार ईरान के समर्थन और अमेरिका-इजराइल के खिलाफ नारेबाजी भी देखने को मिली।




