कॉकरोच जनता पार्टी के बड़े चेहरे आशुतोष रांका और सौरभ दास को दिल्ली पुलिस ने सुबह तीन बजे गिरफ्तार किया और इसके बाद सीधे तिहाड़ जेल भेज दिया। आज आशुतोष रांका अपने जन्मदिन की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने ऐन वक्त पर पूरा खेल पलट दिया। अब तक पुलिस कॉकरोच जनता पार्टी के किसी भी लीडर को तिहाड़ जेल नहीं भेज पाई थी। डिटेंशन में रखने के बाद उन्हें छोड़ दिया जाता था, लेकिन इस बार पुलिस ने ऐसा एक्शन लिया, जिसने अभिजीत दीपके को हैरान कर दिया है। पहले देखिए आशुतोष रांका और सौरभ दास की गिरफ्तारी क्यों हुई, उसके बाद बताएंगे गुस्साए अभिजीत ने कौन-सा ऐलान किया है। दरअसल, 10 अक्टूबर को CJP के प्रोटेस्ट को पुलिस ने कामयाब नहीं होने दिया था।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद क्या हुआ?
12 अक्टूबर को सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट स्थल की सूची से हटाने का ऐलान किया था और इसी के बाद 13 अक्टूबर की सुबह सौरभ दास और आशुतोष रांका जंतर-मंतर पहुंचे।
जंतर-मंतर पर नो-प्रोटेस्ट जोन घोषित होने के बावजूद दोनों कई कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर के अंदर गए और वहां राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा था कि हम जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करेंगे। जंतर-मंतर पर सुरक्षाकर्मियों के साथ इनकी बहसबाजी हुई।
रात तीन बजे पुलिस की कार्रवाई, दो नेताओं को तिहाड़ भेजा
CJP के नेताओं को लगा था कि कहानी यहीं पर खत्म हो गई। 14 अक्टूबर की सुबह जब CJP की टीम आशुतोष रांका का जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रही थी, तभी रात तीन बजे अचानक दिल्ली पुलिस पहुंच गई और आशुतोष रांका और सौरभ दास के साथ अजिंक्या शिंदे को भी गिरफ्तार कर लिया। पहले इसे सिर्फ एहतियातन गिरफ्तारी का नाम दिया गया, लेकिन इसके बाद दिल्ली पुलिस ने बड़ा कदम उठाया। पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी के अजिंक्या शिंदे को बॉन्ड भरवाने के बाद रिहा कर दिया, वहीं सौरभ दास और आशुतोष रांका को बेल बॉन्ड की शर्तें तोड़ने के जुर्म में पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
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अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
पुलिस के एक्शन से गुस्साए अभिजीत दीपके ने कहा “मैं नरेंद्र मोदी से कहना चाहता हूं कि अगर देश में इमरजेंसी लगानी है, तो आधिकारिक तौर पर लगाइए। आप अनौपचारिक इमरजेंसी चला रहे हैं, जहां जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ रही है। इस देश में तिरंगा फहराना इतना बड़ा अपराध हो गया है कि इसके लिए पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा जा रहा है।”
अभिजीत ने कहा कि हम ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से पहले नहीं रुकेंगे। ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त की कुर्सी छोड़नी होगी। ये लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है, ये डेमोक्रेसी को जिंदा रखने की लड़ाई है।
CJP आज ही मीटिंग करेगी और फैसला लेगी कि हमें क्या करना है।




