UP Politics: यूपी के 5 ठाकुर बाहुबली नेता, 2027 में किस पार्टी के साथ दिखेगा किसका दम?

उत्तर प्रदेश यानी भारत की सियासत का वह सबसे बड़ा अखाड़ा, जहाँ दिल्ली की सत्ता का रास्ता तय होता है। यूपी की राजनीति में हर जाति और हर समीकरण का अपना गणित है। लेकिन जब बात सत्ता के गलियारों में धमक और रसूख की आती है, तो पाँच बाहुबली नेताओं के नाम चर्चा में रहते हैं। इन नेताओं ने पहले भी यूपी के चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया है और 2027 के विधानसभा चुनाव में भी इनकी भूमिका अहम मानी जा रही है। आज आपको यूपी के पाँच ठाकुर बाहुबली नेताओं के बारे में बताएंगे। जानेंगे कि ये किस पार्टी के करीब माने जाते हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव में इनकी क्या भूमिका हो सकती है। इनमें एक बड़ा नाम है राजा भैया।

1. राजा भैया: कुंडा की राजनीति का बड़ा नाम
प्रतापगढ़ की कुंडा विधानसभा सीट पर पिछले तीन दशकों से किसी पार्टी का नहीं, बल्कि एक नाम का सिक्का चलता आया है। वह नाम है क्षत्रिय समाज के रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का। यहाँ राजा भैया का ऐसा रसूख माना जाता है कि वे निर्दलीय लड़ें या किसी पार्टी से, जीत का सेहरा अक्सर उन्हीं के सिर बँधता रहा है। अतीत में कल्याण सिंह से लेकर मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव तक की सरकारों में राजा भैया निर्दलीय विधायक रहते हुए भी कैबिनेट मंत्री रहे। हालाँकि, अब राजा भैया की अपनी पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) है और वे इसी पार्टी से विधायक हैं। सवाल यह है कि 2027 में राजा भैया किसका समर्थन करेंगे? राज्यसभा और विधान परिषद के चुनावों के दौरान उनके वोट और राजनीतिक रुख को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। इसी वजह से उनके बीजेपी की ओर झुकाव को लेकर भी राजनीतिक अटकलें लगाई जाती हैं।

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2. बृजभूषण शरण सिंह: देवीपाटन मंडल में मजबूत पकड़
गोंडा, बहराइच और बलरामपुर जैसे देवीपाटन मंडल के जिलों में जिनकी राजनीतिक पकड़ की चर्चा होती है, वे क्षत्रिय समाज के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह हैं। अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत बीजेपी से करने के बाद वे बीच में समाजवादी पार्टी के टिकट पर भी संसद पहुँचे। बाद में बीजेपी में वापसी करते हुए वे पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। बृजभूषण शरण सिंह का लक्ष्य 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ना बताया जाता है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका पर भी नजर रहेगी। राजनीतिक आकलन है कि वे खुद चुनाव लड़ने के बजाय अपने परिवार के सदस्यों या करीबी समर्थकों को बीजेपी के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतारकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश कर सकते हैं।

3. धनंजय सिंह: पूर्वांचल की सियासत में प्रभावशाली चेहरा
जौनपुर की धरती से लेकर लखनऊ के गलियारों तक पूर्वांचल की ठाकुर राजनीति में धनंजय सिंह भी एक बड़ा नाम हैं। उन्हें जौनपुर के प्रभावशाली क्षत्रिय चेहरों में गिना जाता है। अतीत में निर्दलीय विधायक बनने से लेकर बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर संसद पहुँचने तक का सफर तय करने वाले धनंजय सिंह समय के साथ अलग-अलग राजनीतिक करवटें लेते रहे हैं। वर्तमान राजनीतिक समीकरणों में उनके जनता दल यूनाइटेड (JDU) से जुड़ाव की चर्चा है और जौनपुर में उनकी जमीनी पकड़ को भी अहम माना जाता है। साल 2027 के विधानसभा चुनाव में वे जौनपुर की किसी प्रमुख सीट से एनडीए गठबंधन के घटक दल के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरेंगे या किसी अन्य तरह से भूमिका निभाएँगे, इस पर अभी राजनीतिक नजरें रहेंगी।

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4. बृजेश सिंह: पूर्वांचल में परिवार की राजनीतिक ताकत
वाराणसी, चंदौली और गाजीपुर में बाहुबली नेता और पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह के प्रभाव की चर्चा होती रही है। जेल में रहते हुए भी वाराणसी की स्थानीय निकाय सीट से निर्दलीय एमएलसी बनकर उन्होंने अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया था।
बृजेश सिंह औपचारिक रूप से किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हैं, लेकिन उनके परिवार की राजनीति में मजबूत मौजूदगी है। उनके भतीजे सुशील सिंह बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने हैं। साल 2027 के विधानसभा चुनाव में बृजेश सिंह के बेटे या परिवार के किसी अन्य सदस्य को चुनावी मैदान में उतारे जाने की संभावना को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि परिवार पूर्वांचल की किसी अहम सीट से बीजेपी या बीजेपी समर्थित दल के टिकट पर चुनाव लड़ने की रणनीति अपना सकता है। हालाँकि, उम्मीदवार और पार्टी को लेकर अंतिम फैसला होने तक इसे संभावित राजनीतिक परिदृश्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

5. अभय सिंह: गोसाईगंज की राजनीति में अहम चेहरा
अयोध्या की गोसाईगंज विधानसभा सीट और लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र आंदोलन से लेकर आज तक अवध की राजपूत राजनीति में अभय सिंह की चर्चा होती रही है। वे लंबे समय तक समाजवादी पार्टी के कद्दावर विधायक और पार्टी के अहम नेताओं में गिने जाते रहे। अभय सिंह ने समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। अब उनकी राजनीतिक भूमिका को बीजेपी के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव में गोसाईगंज सीट से उनकी उम्मीदवारी को लेकर चर्चा हो सकती है, लेकिन बीजेपी की ओर से आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किए जाने तक इसे तय नहीं माना जा सकता।

2027 के चुनाव में किसकी भूमिका होगी अहम?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में राजा भैया, बृजभूषण शरण सिंह, धनंजय सिंह, बृजेश सिंह और अभय सिंह जैसे नेताओं की क्षेत्रीय पकड़ और राजनीतिक प्रभाव को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव में इनकी भूमिका, इनके समर्थकों की रणनीति और अलग-अलग दलों के साथ इनके समीकरण चुनावी चर्चा का अहम हिस्सा बन सकते हैं। इनमें से कौन चुनाव लड़ेगा, किस पार्टी के साथ रहेगा और किसे समर्थन देगा—इसका अंतिम जवाब आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और पार्टियों की आधिकारिक घोषणाओं से ही स्पष्ट होगा।

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Author: Gadar Tv

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