एक तरफ पूरा ईरान अयातुल्ला अली खामनेई को अंतिम विदाई दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। गम, गुस्से और आंसुओं के बीच मशहद शहर में अयातुल्ला अली खामनेई को सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी चल रही है। ईरान के कोम शहर से लेकर इराक के कर्बला तक शोक का माहौल है, लेकिन इसी बीच दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई तेज हो गई हैं।
अमेरिका ने 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी पक्ष के अनुसार इन हमलों में कई ठिकानों को नुकसान पहुंचा। वहीं ईरानी मीडिया और स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि इन हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 14 बताई जा रही है
ईरानी सेना के अनुसार उसने कतर, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए। ईरान का दावा है कि इन हमलों में कुवैत के पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, कतर के अर्ली वॉर्निंग सिस्टम और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ईंधन भंडारण केंद्र को निशाना बनाया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरानी सेना ने कहा कि अमेरिकी हमलों का जवाब आगे भी दिया जाएगा।
मशहद में उमड़ा जनसैलाब
इसी बीच मशहद शहर में लाखों लोगों की भीड़ अंतिम विदाई के लिए पहुंची। कई जगहों पर अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी भी देखने को मिली।
ईरानी मीडिया और स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि मशहद शहर के दो महत्वपूर्ण पुल अमेरिकी हमलों में क्षतिग्रस्त हुए हैं। मशहद, अयातुल्ला अली खामनेई का गृह नगर माना जाता है और यहीं उन्हें यही सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है। ईरानी पक्ष ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अंतिम यात्रा को प्रभावित करना था।
ये भी पढ़ें, इराक पहुंचा अयातुल्ला अली खामनेई का जनाज़ा, तो नजफ और कर्बला में उमड़ा जनसैलाब
अमेरिका और ईरान के अलग-अलग दावे
ईरान ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका ने खामनेई के जनाज़े को प्रभावित करने की कोशिश की है और इसका जवाब दिया जाएगा। वहीं अमेरिकी पक्ष का कहना है कि कार्रवाई ईरान की ओर से पहले हुई घटनाओं के जवाब में की गई।
मशहद में होगा दफन
अयातुल्ला अली खामनेई को ईरान के पवित्र शहर मशहद में इमाम रज़ा के रौज़े के पास सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ईरानी मीडिया में दावा किया गया है कि ईरान और इराक में अंतिम यात्रा के दौरान करोड़ों लोग शामिल हुए हैं। हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।




