उत्तर प्रदेश के बाहुबलियों के 5 बेटे जिन्होंने संभाली पिता की गद्दी ?

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उत्तर प्रदेश की राजनीति और बाहुबल का रिश्ता बेहद पुराना रहा है। एक दौर था जब यूपी में बाहुबली नेताओं की तूती बोला करती थी। कहा जाता था कि उनके एक इशारे पर सरकारें तक फैसले बदलने को मजबूर हो जाती थीं। आज हम आपको उन्हीं पांच बाहुबली नेताओं के बेटों के बारे में बताएंगे, जो पिता के बाद राजनीति में आए या उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें से कोई जेल में है तो कोई राजनीति में सक्रिय है। सबसे पहले बात करते हैं मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की।

मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी
उत्तर प्रदेश से पांच बार विधायक रह चुके मुख्तार अंसारी की 2024 में बांदा जेल में मौत हुई थी। जब पिता की मौत हुई, तब उनका बेटा अब्बास अंसारी कासगंज जेल में बंद था। अब्बास न तो पिता के जनाज़े में शामिल हो पाया था और न ही उन्हें आखिरी विदाई दे सका था। हालांकि पिता के सामने ही अब्बास अंसारी ने 2022 में मऊ से चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रख दिया था। अब्बास अंसारी आज भी मऊ से विधायक हैं। अब्बास पर कई मामले दर्ज हैं। वह नेशनल लेवल के शूटर भी रह चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। आज अब्बास पूर्वांचल की राजनीति में अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और उनके वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं।

अतीक अहमद के बेटे अली-उमर
दूसरे नंबर पर नाम आता है अतीक अहमद के बेटों का। 15 अप्रैल 2023 को अतीक अहमद की मौत हुई। इससे पहले उनके दोनों बड़े बेटे अली और उमर जेल भेजे जा चुके थे। दोनों अपने पिता के जनाज़े में शामिल नहीं हो पाए थे। दोनों पर अपहरण, रंगदारी और अन्य आपराधिक मामलों के आरोप हैं। जब अली और उमर अपने छोटे भाई अबान के जनाज़े में शामिल होने के लिए बाहर आए, तो उनके वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए। उमर ने अपने छोटे भाई के जनाज़े की नमाज़ पढ़ाई। अतीक का बड़ा बेटा उमर जेल में इस्लामिक किताबें पढ़ता है और नमाज़ पढ़ता है। अली भी किताबें पढ़ने का शौकीन है। दोनों भाई अलग-अलग जेलों में बंद हैं, जबकि बाहर बचा इकलौता भाई अहज़ाम अब परिवार के साथ है।

बाहुबली विजय मिश्रा का बेटा विष्णु मिश्रा

इसके बाद नाम आता है यूपी के बाहुबली नेता विजय मिश्रा का। 80 के दशक में विजय मिश्रा का नाम पूरे यूपी में गूंजता था। कहा जाता है कि मुलायम सिंह यादव, विजय मिश्रा को अपने बेटे की तरह मानते थे। हालांकि योगी सरकार में विजय मिश्रा भी सलाखों के पीछे हैं। कोर्ट ने छह साल पुराने एक मामले में विजय मिश्रा, उनकी पत्नी और उनके बेटे विष्णु मिश्रा को 10-10 साल की सजा सुनाई थी। विष्णु मिश्रा बिजनेसमैन हैं और उनके खिलाफ भी कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। इसी वजह से विजय मिश्रा के बाद उनकी राजनीतिक और पारिवारिक विरासत को लेकर उनके बेटे का नाम भी चर्चा में रहा, लेकिन फिलहाल विष्णु मिश्रा भी कानूनी मामलों में घिरे हुए हैं।

हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी

इसके बाद आते हैं हरिशंकर तिवारी। हरिशंकर तिवारी पूर्वांचल के दबंग नामों में रहे हैं। 80 और 90 के दशक में शायद ही कोई ऐसी सरकार बनी हो, जिसका हिस्सा हरिशंकर तिवारी नहीं रहे। हरिशंकर तिवारी के बेटे हैं विनय शंकर तिवारी। विनय शंकर तिवारी भी राजनीति में आए और 2017 में चिल्लूपार विधानसभा सीट से विधायक बने थे। विनय शंकर तिवारी पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई मामले दर्ज रहे हैं। उन्हें 2025 में गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई और वह जेल से बाहर आ गए। अब विनय शंकर तिवारी समाजवादी पार्टी के साथ राजनीति में सक्रिय हैं और आगे चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।

बाहुबली बृजेश सिंह का बेटा सिद्धार्थ सिंह

पांचवें नंबर पर नाम आता है पूर्वांचल के बाहुबली नेता बृजेश सिंह के बेटे सिद्धार्थ सिंह का। बृजेश सिंह पूर्वांचल के बड़े बाहुबली नामों में गिने जाते हैं। अब उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह भी राजनीति में एंट्री की तैयारी कर रहे हैं। 2026 में बृजेश सिंह ने अपने बेटे सिद्धार्थ को जौनपुर की राजनीति में उतारने की तैयारी शुरू की है। सिद्धार्थ सिंह को जौनपुर के केराकत इलाके से जिला पंचायत चुनाव लड़ाने की तैयारी है। यानी अब बृजेश सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह मैदान में उतरने जा रहे हैं।

बृजेश सिंह और उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह पिछले कुछ समय से जौनपुर में सक्रिय नजर आ रहे हैं। सिद्धार्थ की एंट्री को जौनपुर की सियासत में बृजेश सिंह के बढ़ते प्रभाव के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि जौनपुर को लंबे समय से बाहुबली धनंजय सिंह का गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में अगर सिद्धार्थ सिंह चुनावी मैदान में उतरते हैं तो जौनपुर की सियासत में बृजेश सिंह और धनंजय सिंह के बीच नया मुकाबला देखने को मिल सकता है।

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यूपी के इन बाहुबलियों के बेटों का क्या है हाल?

यूपी की सियासत में कभी दबदबा रखने वाले इन बाहुबली नेताओं की अगली पीढ़ी का सफर अलग-अलग रास्तों पर जा रहा है। अब्बास अंसारी राजनीति में सक्रिय हैं, अतीक अहमद के बेटे कानूनी मामलों के चलते जेल में हैं, विष्णु मिश्रा भी कानूनी मामलों में घिरे हैं, विनय शंकर तिवारी राजनीति में सक्रिय हैं और बृजेश सिंह के बेटे सिद्धार्थ सिंह अब चुनावी राजनीति में एंट्री की तैयारी कर रहे हैं।

यानी पिता के बाद किसी ने सियासत संभाली, किसी को जेल जाना पड़ा तो कोई अब अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। आने वाले वक्त में इन नेताओं के बेटों की राजनीति किस दिशा में जाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

Gadar Tv
Author: Gadar Tv

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