कहते हैं जंग की आग में सिर्फ सरहदें नहीं झुलसतीं, बल्कि बड़े-बड़े हुक्मरानों के तख्तो-ताज भी खाक हो जाते हैं। आज यही हुआ है दुनिया के सबसे ताकतवर नेता डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ। जो ट्रंप और नेतन्याहू मिलकर ईरान को बर्बाद करने का नक्शा बना रहे थे, जो ईरान की बर्बादी का सपना देखते थे, आज वो अपनी ही बिछाई बिसात पर खुद ही चारों खाने चित हो गए। ईरान से लड़ते-लड़ते ट्रंप ने अमेरिका में अपनी पावर को खो दिया, दूसरी तरफ नेतन्याहू इजरायल की सत्ता से ही बेदखल हो गए हैं। अमेरिका और इजराइल दोनों ही देशों में मुस्लिमों ने तख्तापलट किया है। लगातार ईरान पर हमले करने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देशभक्ति के नाम पर मिडटर्म का इलेक्शन लड़ा था। मुस्लिमों को जेहादी कहा था। ट्रंप को लगा था कि बड़ी जीत हासिल होगी।
लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अपना पूर्ण बहुमत गंवा दिया है। जिस सीनेट पर ट्रंप का दबदबा था, वहाँ डेमोक्रेट्स ने बाजी मार ली। खुद ट्रंप के सबसे भरोसेमंद साथी और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कैमरे के सामने आकर यह कबूल किया कि इस ऐतिहासिक हार की सबसे बड़ी वजह कुछ और नहीं, बल्कि ‘ईरान के साथ छिड़ी जंग’ है। अमेरिकी जनता ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ जंग से वो नाराज़ है और अमेरिका की जनता ने 12 मुस्लिम उम्मीदवारों को जिताया है। यानी पहली बार अमेरिका में 12 मुस्लिम सांसद बने हैं। अब्दुल एल सय्यद, जिन्हें ट्रंप ने जेहादी बताया था, वो चुनाव जीतकर अमेरिकी इतिहास में पहले मुस्लिम सीनेटर बने हैं।
अमेरिका में ट्रंप की हार की कई वजह रहीं, जैसे महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और ट्रंप के फैसलों के खिलाफ वोटिंग। जनता ने ट्रंप को चुनावी मैदान में झटका दिया। हालांकि, इस हार के बाद ट्रंप ईरान पर हमले कर रहे हैं और लगातार ईरान को धमकियाँ दे रहे हैं। जबकि दूसरी तरफ, ट्रंप के सबसे बड़े युद्ध-साझेदार बेंजामिन नेतन्याहू की हालत भी इजरायल में बदतर हो चुकी है। ईरान के साथ महीनों से चल रही इस खींचतान और हिजबुल्लाह-हमास के मोर्चे पर इजरायल के सैकड़ों सैनिकों की शहादत से इजरायली जनता भी नाराज़ है।
इजरायल के चुनाव में नेतन्याहू को हार मिली। इजरायल की 120 सीटों वाली संसद में बहुमत के लिए 61 सीटें चाहिए थीं, लेकिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गठबंधन महज़ 53 सीटों पर सिमटकर फेल हो गया। जबकि दूसरी तरफ, पूर्व आर्मी चीफ और मुख्य विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने 48 सीटें जीतीं, लेकिन असली बाजी अरब पार्टियों ने मारी, जिन्होंने 19 सीटें जीतकर इजरायल के सत्ता के समीकरण को ही बदल दिया। नतीजों के 7 दिन बाद भी सभी पार्टियाँ इजरायल में प्रधानमंत्री नहीं बना पाईं। माना जा रहा है कि आइजेनकोट अरब पार्टियों के साथ मिलकर इजरायल में सरकार बनाएंगे और नेतन्याहू सत्ता से बेदखल होंगे। यानी दोनों देशों में मुस्लिमों की सरकार में भागीदारी होगी। आज आलम ये है कि ट्रंप और नेतन्याहू ने जिस ईरान को घुटनों पर लाने का दावा किया था, उस ईरान के तेहरान और बाकी शहरों में जश्न का माहौल है। वहाँ की जनता इसे ट्रंप और नेतन्याहू की रणनीतिक और अहंकार की हार बता रही है।



